भारत–यूके साझेदारी से UAV टेक्नोलॉजी में बड़ा कदम, हाइब्रिड प्रणोदन परियोजना को मंजूरी

नई दिल्ली। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “बूस्ट इलेक्ट्रिक जंप टेक-ऑफ (बीई-जेटीओ)” परियोजना के लिए गुरुग्राम स्थित केसी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह पहल भारत–यूके सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत यूके की एआरसी एयरोसिस्टम्स लिमिटेड के साथ साझेदारी में आगे बढ़ाई जाएगी।
टीडीबी द्वारा समर्थित यह परियोजना उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन आधारित जंप टेक-ऑफ (जेटीओ) प्रणाली के विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य मानव रहित और हल्के विमान प्लेटफॉर्म की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करना है। इसके तहत रोटरक्राफ्ट प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण और सत्यापन के लिए एक समर्पित टेस्ट बेंच सुविधा स्थापित की जाएगी।
प्रस्तावित तकनीक हाइब्रिड प्रणोदन को एकीकृत कर जाइरोकोप्टर और मानव रहित हवाई प्रणालियों को कम दूरी या लगभग वर्टिकल टेक-ऑफ की क्षमता प्रदान करेगी। इससे परिचालन लचीलापन बढ़ेगा और दूरस्थ तथा दुर्गम क्षेत्रों में उपयोग आसान होगा।
यह तकनीक क्षेत्रीय संपर्क, आपदा प्रतिक्रिया, चिकित्सीय निकासी, मानव रहित लॉजिस्टिक्स और निगरानी अभियानों में अहम भूमिका निभा सकती है। खासतौर पर कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता अधिक मानी जा रही है।
यह परियोजना उत्तर भारत में अपनी तरह की पहली प्रणोदन परीक्षण सुविधा स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। इससे मानव रहित और उन्नत एरियल मोबिलिटी सिस्टम्स पर काम कर रहे स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को प्रमाणित परीक्षण अवसंरचना उपलब्ध होगी।
यह सुविधा न केवल इन-हाउस विकास को समर्थन देगी, बल्कि परीक्षण सेवाएं उपलब्ध कराकर हाइब्रिड प्रणोदन समाधानों के व्यावसायीकरण को भी गति देगी। इससे व्यापक एयरोस्पेस इकोसिस्टम को लाभ मिलने की उम्मीद है।
टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक अनुसंधान पहलें रणनीतिक क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने हाइब्रिड प्रणोदन और उन्नत टेक-ऑफ प्रणालियों को भारत की विमानन क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।
केसी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रवर्तकों ने इस समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में तकनीक का परीक्षण करने और भविष्य के विमानन समाधानों के विकास को गति देने में मदद करेगी।