भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे, किसी बड़ी बाधा की आशंका नहीं : पीयूष गोयल

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों देशों में राजनीतिक सोच में बदलाव होने के बावजूद यह साझेदारी आगे और मजबूत होती जाएगी। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध पहले से ही काफी मजबूत हैं और फिलहाल उन्हें कोई समस्या नजर नहीं आती।
उन्होंने कहा, “मेरे विचार में दोनों देशों के बीच साझेदारी बेहद ठोस और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देश हैं। यह याद रखना जरूरी है कि यह संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और मेरा मानना है कि आने वाले वर्षों में भी वह ऐसा ही बना रहेगा। कुल मिलाकर, मुझे अमेरिका के साथ समझौते करने में कोई बड़ी बाधा दिखाई नहीं देती।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि यह साझेदारी व्यापार से आगे बढ़कर रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं और लोगों के बीच मजबूत संपर्क तक फैली हुई है। उन्होंने कहा, “हकीकत यह है कि भारत और अमेरिका के बीच बहुत करीबी संबंध हैं और दोनों कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इनमें संयुक्त रक्षा अभ्यास और प्रौद्योगिकी, वस्तुओं तथा सेवाओं की खुली आपूर्ति शृंखलाओं को सुनिश्चित करने के लिए सहयोग भी शामिल है। भारत-अमेरिका संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं और मेरा मानना है कि दोनों देशों में राजनीतिक सोच में किसी भी बदलाव के बावजूद ये संबंध और मजबूत होंगे।”
गोयल ने कहा कि इस संबंध की मजबूती “हमारी आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं” से आती है। उन्होंने कहा, “इसलिए यह एक स्थिर और मजबूत साझेदारी है और मुझे नहीं लगता कि दुनिया के बाकी देशों को इसे लेकर चिंता करने की जरूरत है।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले चार से साढ़े चार वर्षों में भारत ने 38 विकसित देशों के साथ वरीयता प्राप्त व्यापार समझौतों (प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट्स) में प्रवेश किया है।

पीयूष गोयल ने कहा, “हमारा उद्देश्य भारत के बाजारों को दुनिया के लिए खोलना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय कारोबारों के लिए भी दूसरे देशों के बाजार समान रूप से सुलभ हों। वर्ष 2014 तक भारत को लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं तक वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच प्राप्त थी। आज हमारे व्यापार समझौते लगभग 70 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं।”