नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा करते हुए मातृभूमि की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सर्वकल्याणकारी परंपरा को नमन किया। उन्होंने कामना की कि यह पवित्र भूमि सदैव सभी के लिए सुख, शक्ति और समृद्धि का स्रोत बनी रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की भूमि केवल भौतिक संपन्नता की नहीं, बल्कि साधना, उपासना, साहस और शक्ति की भी पुण्यभूमि रही है। उन्होंने इसे सर्वकल्याण की भावना से जुड़ी एक पवित्र धरती बताया।
पीएम नरेन्द्र मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने लिखा—”हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।
यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्। गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।”
इस संस्कृत श्लोक में उस भूमि की महिमा का वर्णन किया गया है जहां पूर्वजों ने महान कार्य किए और जहां देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की। यह श्लोक मातृभूमि से प्रार्थना करता है कि वह सभी को समृद्धि, शक्ति, पशुधन और कल्याण प्रदान करे।