अल-नीनो के संभावित असर पर पीएमओ की उच्च स्तरीय समीक्षा, मंत्रालयों को राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने खरीफ सीजन और विभिन्न क्षेत्रों पर अल-नीनो के संभावित प्रभाव की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में कृषि, बिजली, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आर्थिक मामलों, उपभोक्ता मामलों सहित 15 से अधिक मंत्रालयों और विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में अल-नीनो से निपटने की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मंत्रालयों को बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और राज्यों के साथ समन्वय बनाकर सूक्ष्म स्तर की रणनीति अपनाने के निर्देश दिए गए।
मानसून और अल-नीनो की स्थिति की हुई समीक्षा
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मानसून की मौजूदा स्थिति और अल-नीनो के संभावित प्रभाव की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून करीब 10 दिन देरी से पहुंचा, लेकिन 7 जुलाई 2026 तक देश में वर्षा की कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून सामान्य से बेहतर रहा है, जबकि जुलाई और अगस्त में कमजोर से मध्यम स्तर के अल-नीनो की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया कि अल-नीनो वाले वर्षों में हमेशा सामान्य से कम वर्षा होना जरूरी नहीं होता।
कृषि क्षेत्र के लिए विशेष रणनीति तैयार
कृषि मंत्रालय ने खरीफ फसलों पर संभावित प्रभाव से निपटने की तैयारियों की जानकारी दी। राज्यों के साथ ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा, जलाशयों की स्थिति, बुवाई, बाजार, कीट और बीमारियों की निगरानी की जा रही है। 262 संवेदनशील जिलों के लिए कृषि आपदा योजनाओं को अद्यतन किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए अल-नीनो प्रबंधन संबंधी मानक संचालन प्रक्रियाएं भी जारी की हैं।
फसल बीमा, चारा और पेयजल पर विशेष फोकस
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे को संवेदनशील राज्यों में बढ़ाने पर जोर दिया गया। पशुपालन विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का नियमित आकलन करने के निर्देश दिए गए। वहीं, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को संवेदनशील जिलों में सूक्ष्म स्तर पर निगरानी और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
स्वास्थ्य, आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की उपलब्धता पर नजर
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लू, अधिक नमी और डेंगू जैसी स्थितियों से निपटने के लिए जारी एडवाइजरी और निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने चावल, गेहूं और दालों के बफर स्टॉक तथा खुदरा कीमतों की स्थिति से अवगत कराया। उर्वरक विभाग ने रबी सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने की जानकारी दी। सभी संबंधित विभागों को आवश्यक वस्तुओं और उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए।
रोजगार, बिजली और जल संसाधनों की भी समीक्षा
ग्रामीण विकास विभाग ने बताया कि ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन’ के तहत 1 जुलाई से अब तक एक करोड़ कार्यदिवसों का सृजन किया जा चुका है। कृषि अनुसंधान विभाग ने जलवायु अनुकूल बीजों के प्रसार की जानकारी दी, जबकि बिजली मंत्रालय ने उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति को संतोषजनक बताया। जल संसाधन विभाग ने भी जलाशयों और भूजल की मौजूदा स्थिति की समीक्षा प्रस्तुत की।
राज्यों के साथ समन्वय और सतत निगरानी के निर्देश
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सभी मंत्रालयों को राज्यों के साथ समन्वय बनाकर संवेदनशील जिलों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। साथ ही चारे, पेयजल, जलाशयों के जलस्तर और जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देने तथा सभी मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।